निर्वाचनायोगस्य स्पष्टीकरणम्: ' फोर्म्६' इत्यस्मिन् संशोधनं न कृतम् इति।
निर्वाचनायोगेन सर्वोच्चन्यायालयम् प्रति स्पष्टीकृतं यत् प्रथमवारं मतदातासूच्यां नामसमावेशनाय प्रयुज्यमाने ' फोर्म् ६' इत्यस्मिन् अस्मद्द्वारा कश्चन संशोधनं न कृतम् इति। एतादृशं संशोधनं कर्तुं केवलं केन्द्रीयसरकारस्य एव अधिकार: अस्ति इति आयोगेन अवगतम्।
विशेष-गहन-पुनरीक्षण-सम्बद्धा: (SIR) सर्वे निर्णया: मुख्य-निर्वाचन-आयुक्तेन ज्ञानेशकुमारेण अन्यै: निर्वाचन-आयुक्ताभ्यां च मिलित्वा सर्वसम्मत्या एव गृहीता:, न तु कश्चन व्यक्तिगतरूपेण निर्णय: कृतः इति आयोगेन निवेदितम्।
मूल-'फोर्म् ६' इत्यस्मिन् परिवर्तनं न कृतम्, अपितु केवलम् आवेदनेन सह प्रस्तुतस्य विशेष-घोषणापत्रस्य (Declaration) विषये एव चर्चा जाता, तत्तु 'फोर्म् ६' इत्यस्य संशोधनं न भवति इति आयोगेन प्रतिपादितम्।
समाचारपत्राणां वार्तानाम् आधारेण एव याचिकाकर्तृभि: आरोप: कृत: इति कारणेन विधिदृष्ट्या समाचारपत्रवार्ता: प्रमाणरूपेण स्वीकार्य्यं न भवन्ति। अत: एता: याचिका: निरसनीया: इति आयोगेन सर्वोच्चन्यायालय: प्रार्थित:।
English|Hindi 📰
Election Commission's Clarification: No amendment made to 'Form 6'
The Election Commission has clarified to the Supreme Court that no amendment has been made by them to 'Form 6', which is used for enrolling names in the voter list for the first time. The Commission informed that only the Central Government has the authority to make such amendments.
The Commission submitted that all decisions related to the Special Intensive Revision (SIR) were taken unanimously by Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar along with the other Election Commissioners, and no decision was taken individually.
The Commission stated that no changes were made to the original 'Form 6'; rather, discussions were only regarding the special declaration to be submitted along with the application, which does not constitute an amendment to 'Form 6'.
Since the petitioners leveled allegations solely based on newspaper reports, such reports are not legally admissible as evidence. Therefore, the Commission prayed to the Supreme Court that these petitions be dismissed.
चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: 'फॉर्म 6' में कोई संशोधन नहीं किया गया है
चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में यह स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में पहली बार नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' में आयोग द्वारा कोई संशोधन नहीं किया गया है। आयोग ने सूचित किया कि इस तरह के संशोधन करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।
आयोग ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए थे, और कोई भी फैसला व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया गया था।
आयोग ने कहा कि मूल 'फॉर्म 6' में कोई बदलाव नहीं किया गया है; बल्कि केवल आवेदन के साथ जमा किए जाने वाले विशेष घोषणा पत्र (Declaration) के संबंध में चर्चा हुई थी, जो 'फॉर्म 6' का संशोधन नहीं है।
चूँकि याचिकाकर्ताओं ने केवल समाचार पत्रों की खबरों के आधार पर आरोप लगाए हैं, इसलिए ऐसी खबरें कानूनी रूप से साक्ष्य (प्रमाण) के रूप में स्वीकार्य नहीं हैं। अतः, आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय से इन याचिकाओं को खारिज करने की प्रार्थना की है।
